भगवान शिव की आराधना मनुष्य को अहंकार से मुक्त कर सत्य और कल्याण के मार्ग पर ले जाती है : आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री

-शिव महापुराण कथा का भव्य समापन, विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

देहरादून। सरस्वती विहार, अजबपुर खुर्द में सरस्वती विहार विकास समिति के मंदिर प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित ग्यारह दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि करुणा, त्याग, तपस्या और लोकमंगल के प्रतीक हैं। शिव महापुराण हमें यह संदेश देता है कि मनुष्य अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और मोह का त्याग कर सत्य, सेवा और परोपकार के मार्ग पर चले। जिस हृदय में शिवत्व जागृत हो जाता है, वहां से नकारात्मकता स्वतः समाप्त होने लगती है।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव ने स्वयं विषपान कर संसार को अमृत प्रदान किया। उनका जीवन हमें दूसरों के दुःख को बांटने और समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि कथा में सुने गए सद्विचारों को केवल कथा स्थल तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने आचरण और पारिवारिक-सामाजिक जीवन में उतारें। “शिव की सच्ची आराधना तभी है, जब हमारे भीतर दया, प्रेम, क्षमा, सेवा और परोपकार का भाव जागृत हो।”
ग्यारह दिनों तक चली श्री शिव महापुराण कथा के दौरान सरस्वती विहार एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। प्रतिदिन भगवान शिव की महिमा, शिव-पार्वती प्रसंग तथा शिव महापुराण में वर्णित विभिन्न प्रेरक आख्यानों के माध्यम से आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री ने सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की।
इस अवसर पर सरस्वती विहार विकास समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट तथा सचिव गजेंद्र भंडारी सहित समिति के पदाधिकारियों, मंदिर प्रकोष्ठ के सदस्यों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया। समिति के पदाधिकारियों ने आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव और आपसी एकता को मजबूत करते हैं।
श्री शिव महापुराण कथा के समापन के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों ने भगवान शिव का प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में सरस्वती विहार विकास समिति के मंदिर प्रकोष्ठ, स्थानीय निवासियों, मातृशक्ति, युवाओं तथा स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। अंत में सामूहिक आरती एवं भगवान भोलेनाथ के जयघोष के साथ ग्यारह दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का भावपूर्ण समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान सरस्वती विहार क्षेत्र शिवभक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा।

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