-राष्ट्रपति और मानवाधिकार आयोग को भेजा पत्र, पत्रकारों के हित में ठोस पहल की मांग
देहरादून। गांधी जयंती के अवसर पर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखंड की ओर से देशभर में कार्यरत पत्रकारों के अधिकारों एवं हितों के संरक्षण को लेकर ‘मांग दिवस’ मनाया गया। इस दौरान पत्रकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर कई प्रस्ताव पारित किए गए। यूनियन की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर पत्रकारों की लंबित मांगों पर शीघ्र सार्थक पहल किए जाने की मांग की गई। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर प्रवीण मेहता और प्रदेश महासचिव गिरीश पंत की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कहा गया कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुरक्षित मीडिया का वातावरण लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है।
नए मीडिया आयोग के गठन की मांग
यूनियन ने देश में नए और व्यापक मीडिया आयोग के गठन की मांग की। पत्र में कहा गया कि दूसरा प्रेस आयोग वर्ष 1978 में गठित हुआ था, जिसने 1982 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बाद मीडिया के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं। 24 घंटे के समाचार प्रसारण, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के विस्तार ने मीडिया के स्वरूप और सार्वजनिक संवाद को बदल दिया है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप मीडिया क्षेत्र की चुनौतियों, तकनीक, नियमन और नैतिक पहलुओं की समीक्षा के लिए नए मीडिया आयोग का गठन जरूरी है।
पत्रकार सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग
यूनियन ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की सुरक्षा के लिए अलग केंद्रीय कानून बनाने की मांग भी उठाई। पत्र में कहा गया कि पत्रकारों को शारीरिक हमले, हिरासत, ऑनलाइन उत्पीड़न और संस्थागत दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पत्रकार और मीडिया कर्मचारी बिना भय के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें, इसके लिए हिंसा और अनुचित दबाव से सुरक्षा देने वाली प्रभावी कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।
वर्किंग जर्नलिस्ट के लिए विशेष प्रावधान बहाल करने की मांग
जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखंड ने वर्किंग जर्नलिस्ट से जुड़े पुराने कानूनी सुरक्षा प्रावधानों को बहाल करने की मांग की। यूनियन ने नौकरी की सुरक्षा, कार्य के घंटे, विवादों के समाधान और सेवा समाप्ति से जुड़े प्रावधानों को मजबूत किए जाने की आवश्यकता जताई।
नए वेज बोर्ड के गठन की मांग
प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े कर्मचारियों के लिए नए वेज बोर्ड के गठन की मांग भी पत्र में की गई। यूनियन ने कहा कि पत्रकारों और गैर-पत्रकार कर्मचारियों के लिए अंतिम कानूनी वेज बोर्ड के रूप में मजीठिया वेज बोर्ड का गठन वर्ष 2007 में हुआ था। इसके बाद महंगाई और जीवन-यापन की लागत में काफी बदलाव आया है। ऐसे में मीडिया कर्मचारियों के वेतन ढांचे की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समीक्षा आवश्यक है।
‘स्वतंत्र और सुरक्षित प्रेस लोकतंत्र के लिए जरूरी’
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र की सजग प्रहरी है। पत्रकार समाज, शासन और व्यवस्था के बीच संवाद का महत्वपूर्ण सेतु हैं। जनसरोकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आवाज को व्यापक मंच देने में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में देशभर में कार्यरत पत्रकारों के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक हितों के संरक्षण के लिए ठोस पहल समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर प्रवीण मेहता, प्रदेश महासचिव गिरीश पंत, कोषाध्यक्ष ललिता बलूनी, जिला अध्यक्ष मूलचंद शीर्षवाल, जिला महासचिव ज्योति भट्ट, कवर सिंह सन्धू, एसपी उनियाल, अधीर मुखर्जी, द्विजेंद्र दत्त बहुगुणा, दीपक गुप्ता, अभिनव नायक, विजय रावत, देवेंद्र चमोली, समीना, पूर्व जिला अध्यक्ष मोहम्मद शाह नजर, राजीव आनंद, अफरोज खान, अशोक शर्मा, विश्वजीत, अनिल वर्मा, किशन सिंह गुसाईं समेत कई पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।