नेमिनाथ भगवान की भव्य बारात निकली, वैराग्य प्रसंग ने किया भावविभोर

देहरादून। देहरादून में नेमिनाथ भगवान की भव्य बारात निकाली गई। प्रिंस चैक से श्रीजी एवं पूज्य माताजी का पंडाल की ओर मंगल प्रस्थान हुआ। तत्पश्चात श्रद्धालुओं द्वारा श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इस अवसर पर श्री नेमिनाथ विधान के अंतर्गत लघु नाटिका ‘नेमिकुमार, बलराम एवं श्रीकृष्ण वार्ता’ का परिवार के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण मंचन किया गया। नाटिका ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इसी श्रृंखला में पूर्वाह्न 11 बजे नेमिनाथ भगवान की भव्य बारात हिंदू नेशनल स्कूल से प्रारंभ होकर पंडाल तक निकाली गई। बारात में 5 बैंड, 15 झांकियां, पाइप बैंड, मोर की झांकी तथा 20 ई-रिक्शा शामिल रहे। बाहर से आए बैंड दलों में दिल्ली, गुरुग्राम (हरियाणा), अल्ताफ बैंड, पंजाब बैंड एवं जनता बैंड ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
बारात में विकासनगर, ऋषिकेश, मध्य प्रदेश, सहारनपुर, दिल्ली, राजस्थान एवं रुड़की सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु शामिल हुए। बारात सहारनपुर चैक, झंडा बाजार, रामलीला बाजार, पीपल मंडी चैक, राजा रोड, प्रिंस चैक, जैन धर्मशाला होते हुए पुनः सहारनपुर चैक से पंडाल पहुंचकर संपन्न हुई। नेमि कुमार जी की बारात में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पूरे उत्साह एवं उमंग के साथ बारात का आनंद लिया। बारात के पंडाल पहुंचने के पश्चात पूज्य आर्यिका पूर्णमति माताजी ने वैराग्य विषय पर मार्मिक उद्बोधन दिया। उन्होंने भगवान नेमिनाथ के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान नेमिनाथ का विवाह जूनागढ़ के राजा उग्रसेन की पुत्री राजकुमारी राजुल (राजीमती) के साथ तय हुआ था।
उन्होंने बताया कि जब नेमिनाथ जी की बारात द्वारका से जूनागढ़ पहुंची, तब विवाह भोज के लिए बड़ी संख्या में पशुओं को बाड़े में बांधकर रखा गया था। जब नेमिनाथ जी ने उन पशुओं का भय, कंपन और करुण क्रंदन सुना, तो उन्होंने अपने सारथी से उनके तड़पने का कारण पूछा। सारथी ने बताया कि इन जीवों को विवाह के भोज के लिए काटा जाएगा। यह सुनकर करुणा के सागर भगवान नेमिनाथ का हृदय परिवर्तन हुआ। उन्होंने विचार किया कि जिस आनंद और उत्सव की नींव निर्दोष जीवों की हिंसा और रक्त पर टिकी हो, ऐसा सांसारिक सुख व्यर्थ है। उन्होंने उसी क्षण अपना रथ वापस मोड़ लिया, राजसी वैभव एवं विवाह के मोह का त्याग किया और गिरनार पर्वत की ओर कठोर तपस्या एवं वैराग्य के मार्ग पर अग्रसर हो गए।
इसी श्रृंखला में श्रीजी की सायं 7 बजे महाआरती की गई। इसके पश्चात भजन संध्या का आयोजन हुआ। भजन सम्राट रूपेश जैन ने अपनी भजनों की प्रस्तुति से वातावरण को संगीतमय एवं भक्तिमय बना दिया। उन्होंने पूज्य माताजी एवं आचार्य विद्यासागर जी महाराज पर आधारित भजनों की सुंदर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि 18 अगस्त को प्रातः 6 बजे श्रीजी एवं माताजी का पंडाल की ओर मंगल प्रस्थान होगा। प्रातः 6.30 बजे अभिषेक, शांतिधारा एवं जिनेंद्र महाअर्चना होगी। प्रातः 9.30 बजे नेमि प्रभु एवं गुरु पूजन तथा गुरुमां के प्रवचन होंगे। उन्होंने बताया कि भव्य दीक्षा दिवस का आयोजन दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विशिष्ट अतिथियों के रूप में मंत्री सुबोध उनियाल, खजान दास की उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम के विशेष आकर्षण में ‘नेमि कुमार राग से वैराग्य की ओर’ विषय पर पूज्य माताजी का मंगल प्रवचन होगा। इसके साथ ही ‘गुरु समर्पण गौरव गाथा’ की विशेष प्रस्तुति दृष्टि पब्लिक स्कूल, सनावद द्वारा दी जाएगी।

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