देहरादून में ‘द लिटरेरी टेबल’ लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का शुभारंभ

-साहित्य और कला समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यमः प्रेम रंजन अमिनेश

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित फेयरफील्ड बाय मैरियट के सभागार में शनिवार को दो दिवसीय ‘द लिटरेरी टेबल’ लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का दीप प्रज्वलन के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। फेस्टिवल का उद्घाटन मुख्य अतिथि भारतीय रिजर्व बैंक, झारखंड के निदेशक प्रेम रंजन अमिनेश ने किया। कार्यक्रम में देश के जाने-माने लेखक, साहित्यकार, कलाकार और बौद्धिक हस्तियों ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की। फेस्टिवल की निदेशक डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी ने साहित्य और कला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद क्रमवार विभिन्न सत्र आयोजित किए गए, जिनमें साहित्य, कला, अपराध, सामाजिक सरोकार, युद्ध, स्मृति और समकालीन विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। दूसरे सत्र में उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने साइबर अपराध, अन्य आपराधिक घटनाओं तथा पीड़ितों के प्रति पुलिस के रवैये से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने दर्शकों के सवालों के जवाब भी दिए। तीसरे सत्र में जूही खन्ना, एस. समृद्धि गुलाटी और अजिताभा बोस ने प्रतिभाग किया।
‘स्टोरीज ऑफ मेमोरी एंड साइलेंस’ शीर्षक से आयोजित चैथे सत्र में मोना वर्मा, डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी, जया श्री बैनर्जी और गुंजन कावतरा ब्लूजा ने चर्चा की। इस दौरान वर्तमान समय में सामुदायिक एवं सांप्रदायिक मुद्दों तथा हिंदू-मुस्लिम संबंधों से जुड़े सामाजिक माहौल पर विचार व्यक्त किए गए। फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य साहित्य और कला के क्षेत्र में लेखकों तथा रचनाकारों को मंच प्रदान करना और देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं बौद्धिक हस्तियों के साथ विभिन्न समकालीन विषयों पर संवाद को बढ़ावा देना है।
साहित्य समाज को जोड़ने का माध्यम
मुख्य अतिथि प्रेम रंजन अमिनेश ने कहा कि साहित्य एक ऐसा सॉफ्ट शब्द है, जो सभी को साथ लेकर चलता है और लोगों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है। साहित्य और कला ने सदैव समाज में दूरी पैदा करने वाली खाई को कम करने और मिटाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि साहित्य व कला के माध्यम से ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की संस्कृति को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने साहित्य में संस्कृत के महत्व पर भी प्रकाश डाला। हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य में मधुरता का भरपूर समावेश है।
फेस्टिवल के विशिष्ट अतिथि दृष्टि आई इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. गौरव लूथरा ने आयोजकों को कार्यक्रम की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि साहित्य में स्वयं ऐसी गहरी कला निहित है, जो लोगों को एकता के सूत्र में पिरोकर रखने का कार्य करती है।
युद्ध और समाज पर भी हुई चर्चा
पांचवें महत्वपूर्ण सत्र का विषय ‘इन हॉट ब्लड, कोल्ड प्रिंट’ रहा। इसमें लेखिका एवं कॉलमिस्ट बाची करकारिया और डॉ. रूबी गुप्ता ने विचार रखे। बाची करकारिया ने सी.पी. कृष्णन नायर के लेखन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लेखों में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के बीच हुए युद्धों ने समाज के सामने कई तरह के दृश्य और आंदोलन प्रस्तुत किए हैं। युद्धों का असर व्यापार पर भी पड़ा है, जो गंभीर चिंता का विषय रहा है। फेस्टिवल के पहले दिन बाची करकारिया, लेखक एवं टाइम्स ऑफ इंडिया की कॉलमिस्ट, उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार, ईपीएस लेखक, डॉ. शालिनी मलिक, जाने-माने लेखक एवं प्रकाशक तरुण महर्षि, जम्मू की बेस्टसेलिंग लेखिका एवं मनोवैज्ञानिक समृद्धि गुलाटी तथा पुरस्कार प्राप्त लेखिका और फ्रीलांस राइटर डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को सुनने का अवसर साहित्य प्रेमियों को मिला। फेस्टिवल के विभिन्न सत्रों में साहित्य और कला के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों तथा समकालीन विषयों पर हुई चर्चाओं ने प्रतिभागियों और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

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