देशभर के शिक्षकों को आईआईटी रुड़की ने कराया लेखक गांव का शैक्षणिक अनुभव, पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने शिक्षकों से किया सार्थक संवाद

देहरादून। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की में मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित नर्चरिंग फ्यूचर लीडरशिप प्रोग्राम के पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने लेखक गांव का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस शैक्षणिक यात्रा का उद्देश्य शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य, संस्कृति और नेतृत्व के विविध आयामों से परिचित कराना था। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने लेखक गांव परिसर स्थित नालंदा पुस्तकालय, शोध एवं अनुसंधान केंद्र, संजीवनी वाटिका, नक्षत्र वाटिका तथा विरासत भवन के साथ ही विभिन्न अवस्थापनाओं का अवलोकन किया। उन्होंने इन सभी स्थलों की अवधारणा, उनके शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को समर्पित उनके योगदान की विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल श्निशंकश् से प्रतिभागियों की आत्मीय भेंट हुई। शिक्षकों से संवाद के दौरान डॉ. निशंक ने कहा कि ष्शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का शिल्पकार होता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं,  अपितु ऐसे नेतृत्व का निर्माण करना है जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी हो। नई शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार, शोध और मानवीय मूल्यों के समन्वय का मार्ग प्रशस्त करती है। युवा शिक्षकों को अपने ज्ञान, संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण की चेतना जागृत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लेखक गांव की स्थापना का उद्देश्य साहित्य, प्रकृति, संस्कृति और शिक्षा को एक ही परिसर में समाहित कर ऐसा सृजनात्मक वातावरण तैयार करना है, जहाँ से नए विचार, नई ऊर्जा और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इनमें डॉ. अभिषेक ठाकुर (डॉ. वाई.एस. परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, हिमाचल प्रदेश), डॉ. अमनप्रीत कौर (गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर), डॉ सुब्बाराव पिचुका (आईआईटी मद्रास) डॉ. दुर्गा प्रसाद छेत्री (सिक्किम विश्वविद्यालय, गंगटोक), डॉ. गोराचंद दत्ता (आईआईटी खड़गपुर) सहित विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने लेखक गांव की अभिनव अवधारणा और यहाँ के शैक्षणिक वातावरण की सराहना की।
यह शैक्षणिक भ्रमण आईआईटी रुड़की के डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स एवं एनएफएलपी कार्यक्रम निदेशक प्रो. नवीन कुमार नवानी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रो. नवानी ने कहा कि ष्लेखक गांव शिक्षा, साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का एक सार्थक मंच है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण प्रतिभागियों को कक्षा से बाहर सीखने का अवसर प्रदान करते हैं और उन्हें शिक्षा के व्यापक सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयामों से परिचित कराते हैं। मुझे विश्वास है कि यहाँ प्राप्त अनुभव उनके शिक्षण और नेतृत्व कौशल को और समृद्ध करेंगे। भ्रमण के उपरांत प्रतिभागियों ने लेखक गांव को शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम बताते हुए इसे एक प्रेरणास्पद शिक्षण मॉडल की संज्ञा दी।

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