दीपावली पर स्वदेशी की चमक, ग्रामीण महिलाओं ने खड़ा किया लाखों का कारोबार

–कहीं मिलेट्स के गिफ्ट हैंपर, कहीं स्वदेशी एलईडी की लड़ियां, आत्मनिर्भरता की नई रोशनी बनीं ग्रामीण महिलाएं

-हुनर से रोशन हो रही जिंदगी, दीपावली पर महिला समूहों ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

देहरादून। दीपावली के पर्व पर देहरादून में स्वदेशी उत्पादों की चमक और स्थानीय मिलेट्स से बने व्यंजनों का स्वाद त्योहार की खुशियों को खास बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर, मेहनत और उद्यमशीलता के दम पर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। कहीं महिलाएं स्वदेशी हिलान्स एलईडी लड़ियां तैयार कर घरों को रोशन कर रही हैं, तो कहीं पहाड़ी मिलेट्स से बने आकर्षक गिफ्ट हैंपर के जरिए बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। दीपावली के इस सीजन में दोनों क्लस्टर की महिलाओं ने लाखों रुपये का कारोबार कर महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को धरातल पर उतारते हुए विकासखंड विकासनगर के ग्राम सोरना डोभरी स्थित स्वाभिमान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं मिलेट्स आधारित उत्पादों के आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार कर रही हैं। दीपावली और भैया दूज के लिए तैयार इन हैंपर में हस्तनिर्मित कुकीज, रागी हनी बिस्किट, फ्रूट एंड नट्स चॉकलेट, गुड़ मिल्क बिस्किट, रागी चॉकलेट, मंडुआ केक और मंडुआ चॉकलेट जैसे स्थानीय उत्पाद शामिल हैं।

इन उत्पादों की मांग विकासनगर के साथ ही देहरादून, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल तक बढ़ रही है। ग्राहकों की पसंद और जरूरत के अनुसार अलग-अलग आकार और कीमतों के आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार किए जा रहे हैं। स्थानीय मिलेट्स से बने इन उत्पादों के जरिए महिलाएं न केवल पारंपरिक अनाज को बाजार में नई पहचान दिला रही हैं, बल्कि त्योहारों पर स्वदेशी उपहारों की नई परंपरा को भी प्रोत्साहित कर रही हैं।

स्वाभिमान बेकरी यूनिट एवं क्लस्टर की सदस्य कल्पना बिष्ट ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व उन्होंने ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) से जुड़कर बेकरी यूनिट स्थापित की थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें विभिन्न सरकारी आयोजनों में अपने उत्पादों के स्टॉल लगाने के अवसर भी मिले। इस वर्ष दीपावली पर कई बड़े संस्थानों से गिफ्ट हैंपर के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक 2,000 से अधिक गिफ्ट हैंपर तैयार कर उनकी बिक्री से 18 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की जा चुकी है। बेकरी यूनिट के माध्यम से गांव की आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ ही ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।

1.30 लाख स्वदेशी एलईडी लड़ियों का मिला ऑर्डर

वहीं, विकासखंड रायपुर के सोडा सरोली ग्रोथ सेंटर में दिव्य ज्योति क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के तहत स्वदेशी हिलान्स एलईडी लड़ियों का निर्माण कर रही हैं। क्लस्टर की महिलाओं को कुल 1 लाख 30 हजार एलईडी लड़ियां तैयार करने का ऑर्डर मिला है। सोडा सरोली और थानों न्याय पंचायत के ग्रोथ सेंटरों से जुड़ी करीब 350 महिलाएं घरों पर ही इन लड़ियों का निर्माण कर अपनी आजीविका को मजबूती दे रही हैं।

दिव्य ज्योति क्लस्टर की अध्यक्ष ममता कोठियाल ने बताया कि महिलाओं द्वारा तैयार एलईडी लड़ियां बाजार में करीब 120 रुपये प्रति पैकेट की दर से बिक रही हैं, जबकि इनके निर्माण में 70 से 80 रुपये तक की लागत आती है। प्रत्येक महिला को 100 पैकेट तैयार करने पर करीब 700 रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

उन्होंने बताया कि अब तक क्लस्टर की महिलाएं 1 लाख 5 हजार एलईडी लड़ियों का ऑर्डर पूरा कर चुकी हैं, जबकि शेष 25 हजार लड़ियों का निर्माण किया जा रहा है। स्वदेशी लड़ियों के निर्माण के माध्यम से महिलाएं स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ ही चीनी लड़ियों के विकल्प के रूप में स्वदेशी उत्पाद अपनाने का संदेश भी दे रही हैं।

स्थानीय उत्पादों से बढ़ रहे रोजगार के अवसर

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि दोनों क्लस्टर की महिलाएं दीपावली के अवसर पर पूरे उत्साह और समर्पण के साथ आजीविका संवर्धन के कार्यों में जुटी हैं। रायपुर विकासखंड की दिव्य ज्योति क्लस्टर की महिलाओं द्वारा अब तक 1.05 लाख एलईडी लड़ियों के ऑर्डर की आपूर्ति की जा चुकी है और शेष लड़ियों का निर्माण जारी है।

वहीं, विकासनगर की स्वाभिमान महिला क्लस्टर द्वारा पहाड़ी मिलेट्स से तैयार गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के गिफ्ट हैंपर विभिन्न संस्थानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

दीपावली के इस पर्व पर ग्रामीण महिलाओं की यह पहल केवल त्योहार की रौनक बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, स्थानीय संसाधनों के उपयोग, महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रेरक उदाहरण भी बन रही है। घरों में तैयार हो रहे मिलेट्स के स्वादिष्ट उत्पाद और स्वदेशी एलईडी लड़ियां इस बात का प्रमाण हैं कि अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को आर्थिक समृद्धि में बदल सकती हैं।

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