कंडियाल गांव में दो दिवसीय “हुणकोट देव” पूजन समारोह संपन्न, ध्याणियों की विदाई के साथ हुआ समापन

पौखाल/टिहरी।जाखणीधार विकासखंड के अंतर्गत ग्राम सभा कंडियाल गांव में आयोजित दो दिवसीय “हुणकोट देव” वार्षिक पूजन समारोह का समापन ग्राम सभा की ध्याणियों (विवाहित बेटियों) की भावुक विदाई के साथ संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम 4 एवं 5 जून को पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक आस्था के साथ आयोजित किया गया। गौरतलब है कि ग्राम सभा कंडियाल गांव में आयोजित होने वाला यह वार्षिक पूजन गांव की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और पारिवारिक मूल्यों का जीवंत उत्सव होता है। इस अवसर पर गांव की विवाहित बेटियां अपने मायके पहुंचकर ग्राम देवता “हुंकोट देव” की पूजा-अर्चना में भाग लेती हैं तथा गांव की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय भविष्य की कामना करती हैं। कार्यक्रम का संचालन “हुणकोट देवता वार्षिक पूजन समिति” के संरक्षक दिनेश कोठियाल द्वारा किया गया।

इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत कंडियाल गांव के प्रधान भगवती कोठियाल ने कहा कि उत्तराखंड के प्रत्येक गांव में ग्राम देवताओं की परंपरा हमारी सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामवासियों को अपने ग्राम देवता के पूजन और ग्राम संस्कृति के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। ऐसे आयोजन गांवों को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जाखणीधार ब्लॉक प्रमुख राजेश नौटियाल ने ग्राम देवता का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए कहा कि जहां एक ओर पूरा उत्तराखंड पलायन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर कंडियाल गांव जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि ग्राम उत्सवों और ग्राम देवताओं की परंपराओं के माध्यम से लोगों को पुनः अपने गांव और अपनी संस्कृति से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन गांवों में सामाजिक ऊर्जा और सामूहिक चेतना का संचार करते हैं।

इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनाई भी उपस्थित रहे और उन्होंने ग्रामवासियों को इस सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनाई ने इस अवसर पर कहा कि उत्तराखंड की असली पहचान उसकी देव संस्कृति, लोक परंपराओं और ग्राम सभ्यता में बसती है। उन्होंने कहा कि जिस गांव में अपनी संस्कृति जीवित रहती है, वहां सामाजिक एकता और विकास की संभावनाएं भी मजबूत रहती हैं। उन्होंने कंडियाल गांव के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत हैं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का कार्य करते हैं। अपने संबोधन में संरक्षक श्री दिनेश कोठियाल ने कहा कि ग्राम देवताओं की परंपरा उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, अपने देवस्थलों और अपनी लोक परंपराओं से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ध्याणियों की उपस्थिति इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता है, क्योंकि बेटियां ही गांव की संस्कृति और संस्कारों की वास्तविक वाहक होती हैं। कार्यक्रम में क्षेत्र पंचायत सदस्य अंकित कोठियाल, कुल पुरोहित पंडित अनंतराम उनियाल, पंडित भगवती उनियाल, रमेश कोठियाल, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका सरोजनी कोठियाल, शक्ति कोठियाल, अजय कोठियाल, सत्यनारायण कोठियाल, चंद्रमोहन कोठियाल, बिजेंद्र कोठियाल, तुंगेश्वर कोठियाल, सुनीता कोठियाल, प्रमिला कोठियाल सहित ग्राम सभा के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। समारोह का समापन ग्राम की ध्याणियों को सम्मानपूर्वक विदाई देने तथा ग्राम की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ।

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