राज्यपाल ने देखी विनोद कापड़ी की बहुचर्चित फिल्म ‘पायर’

देहरादून। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार विनोद कापड़ी की बहुचर्चित फिल्म ‘पायर’ 30 अक्टूबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। हिमालय की मनमोहक वादियों की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म एक बुजुर्ग दंपति की कहानी बयां करती है, जिनकी दुनिया उनका घर, उनकी यादें और एक-दूसरे के साथ बिताया गया जीवन है। वे अपने बच्चों की प्रतीक्षा में दिन गुजारते हैं, जो बेहतर अवसरों की तलाश में गांव छोड़कर दूर जा बसे हैं। विनोद कापड़ी, सुरेश जोशी और अरिंद्र राय चैधरी द्वारा निर्मित इस फिल्म का निर्माण भगीरथी फिल्म्स और मशकबीन स्टूडियोज के बैनर तले किया गया है। ‘पायर’ में 80 वर्षीय पदम सिंह कापड़ी और 70 वर्षीय हीरा देवी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। दोनों ही उत्तराखंड के निवासी हैं और इस फिल्म से पहले उन्होंने कभी कैमरे का सामना नहीं किया था।
विनोद कापड़ी, फिल्म के कलाकार हीरा देवी और पदम सिंह कापड़ी के साथ कल देहरादून में आयोजित फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग में शामिल हुए। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने भी उनके साथ फिल्म देखी।
पदम सिंह कापड़ी फिल्म में अपने ही नाम का किरदार निभा रहे हैं। वह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। वहीं, हीरा देवी फिल्म में तुलसी की भूमिका में नजर आएंगी। वह एक विधवा, गृहिणी और पूर्व नृत्यांगना हैं।
कुमाऊं हिमालय के एक सुदूर गांव में स्थापित ‘पायर’ एक ऐसे दंपति की भावनात्मक दुनिया को सामने लाती है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन एक-दूसरे के साथ बिताया है। फिल्म के माध्यम से उन माता-पिता और बच्चों के बीच बदलते रिश्तों को भी दर्शाया गया है, जिनके जीवन में पलायन और बेहतर भविष्य की तलाश ने दूरियां पैदा कर दी हैं।
फिल्म के बारे में बात करते हुए निर्देशक विनोद कापड़ी ने कहा, “पायर मूल रूप से प्रेम की कहानी है उन दो लोगों के बीच प्रेम की, जिन्होंने अपना पूरा जीवन साथ बिताया है, और माता-पिता तथा उनके बच्चों के बीच प्रेम की। मैं इस कहानी को ऐसे दो लोगों के माध्यम से कहना चाहता था, जिन्होंने खुद उस जीवन को जिया है। पदम सिंह जी और हीरा देवी जी को ढूंढ पाना एक असाधारण अनुभव था। उनके रिश्ते, उनकी खामोशी और उनकी भावनाओं ने पर्दे पर ऐसी सच्चाई उतारी, जिसे पारंपरिक कलाकारों के लिए दोबारा रच पाना संभव नहीं होता।”
‘पायर’ अब तक 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी है, जिनमें 15 सर्वश्रेष्ठ फिल्म के पुरस्कार शामिल हैं। फिल्म को वॉशिंगटन डी.सी., शिकागो, कनाडा, स्पेन, बोस्टन, स्टटगार्ट, लंदन और बर्मिंघम सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित फिल्म समारोहों में सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, फिल्म को सर्बिया और बोस्टन में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के पुरस्कार भी मिले हैं। फिल्म के संगीत, सिनेमैटोग्राफी और साउंड के लिए भी इसे सराहना और सम्मान प्राप्त हुआ है।उत्तराखंड के पहाड़ों में पूरी तरह से शूट की गई ‘पायर’ हिमालय की भव्यता के साथ एक परिवार की अंतरंग और भावनात्मक कहानी प्रस्तुत करती है। यह फिल्म पलायन और बदलती आकांक्षाओं के कारण बदलते पारिवारिक परिवेश को संवेदनशीलता के साथ दर्शाती है।
‘पायर’ की विशेष स्क्रीनिंग 14 से 17 अक्टूबर तक बेरीनाग, बागेश्वर और श्रीनगर गढ़वाल में भी आयोजित की जाएगी। ये स्क्रीनिंग्स पिक्चरटाइम की मोबाइल थिएटर पहल के माध्यम से आयोजित होंगी। इस पहल का उद्देश्य उन क्षेत्रों तक सिनेमा पहुंचाना है, जहां पारंपरिक सिनेमाघरों की सुविधाएं सीमित हैं या उपलब्ध नहीं हैं। पिक्चरटाइम का मोबाइल थिएटर मॉडल प्रोजेक्शन और साउंड सुविधाओं से सुसज्जित एक पोर्टेबल सिनेमाघर का अनुभव प्रदान करता है। इसके माध्यम से उन स्थानों पर भी बड़े पर्दे पर फिल्म देखने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जहां स्थायी सिनेमाघर मौजूद नहीं हैं। ‘पायर’ (चिता) 30 अक्टूबर को हिंदी और मलयालम भाषाओं में सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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