पुरानी जेल के जीर्णोद्धार की तैयारी, ऐतिहासिक स्वरूप रहेगा सुरक्षित

जिलाधिकारी ने किया पुरानी जेल परिसर का निरीक्षण, जेल संग्रहालय विकसित करने पर बनी सहमति

पौड़ी- जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने शनिवार को जिला मुख्यालय स्थित पुरानी जेल परिसर का स्थलीय निरीक्षण कर इसके जीर्णोद्धार एवं संरक्षण को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के उपरांत जिला कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय नागरिकों एवं व्यापार सभा के पदाधिकारियों से सुझाव भी प्राप्त किए गए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि पुराने जेल भवन को पूर्ण रूप से ध्वस्त नहीं किए जाने पर सहमति बनी। उन्होंने निर्देशित किया कि केवल अत्यधिक जर्जर एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की जाए, जबकि मजबूत संरचना को सुरक्षित रखा जाए, ताकि भवन का ऐतिहासिक स्वरूप अक्षुण्ण बना रहे। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जेल से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं एवं विरासत को संरक्षित करते हुए उन्हें व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को क्षेत्र के इतिहास से परिचित कराया जा सके। साथ ही उन्होंने बताया कि जेल परिसर की शेष भूमि, जहां वर्तमान में जर्जर कार्यालय स्थित हैं, वहां नए कार्यालय कक्ष एवं पार्किंग का निर्माण किया जाएगा।

बैठक में विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि पुरानी जेल जनपद की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसे एक संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी क्षेत्र के इतिहास से परिचित कराया जा सके।

बैठक में आर्किटेक्ट मयंक अग्रवाल द्वारा दिए गए प्रस्तुतिकरण के पश्चात जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान में परिसर में संचालित कार्यालयों के लिए आवश्यकतानुसार नए भवन निर्माण पर सहमति बनी है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुरानी जेल के मुख्य हिस्से को स्मारक के रूप में सुरक्षित रखते हुए शेष भाग में पारंपरिक पहाड़ी शैली में कार्यालय भवनों की कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही उन्होंने कार्यदायी संस्था को 10 अप्रैल तक प्रस्तावित कार्यों की संकल्पना योजना (कॉन्सेप्ट प्लान) तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि भवन के सुदृढ़ हिस्से को विकसित कर एक सुसज्जित जेल संग्रहालय के रूप में तैयार किया जाए, जिससे आमजन को क्षेत्र के इतिहास और विरासत की जानकारी मिल सके।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पुरानी जेल से संबंधित वस्तुओं को संरक्षित करते हुए प्रदर्शित किया जाय, ताकि उसका भावनात्मक महत्व संरक्षित रह सके। इस पर प्रभारी पुरातत्व अधिकारी अनिरुद्ध सिंह बिष्ट ने जानकारी दी कि पुरानी जेल को हेरिटेज स्वरूप देते हुए गेट, फाइबर प्रतिमाएं, वर्दियां, हथकड़ियां, बेड़ियां, बर्तन एवं कैदियों से जुड़ी अन्य ऐतिहासिक वस्तुओं का प्रदर्शन कर एक आकर्षक जेल संग्रहालय विकसित किया जा सकता है।

इस अवसर पर इतिहासकार पद्मश्री डॉ. यशवंत कटोच, अधिशासी अभियंता लोनिवि रीना नेगी, पेयजल निगम बीरेंद्र भट्ट, सहायक अभियंता पुरातत्व अनिल नेगी, लोनिवि अंकिता सक्सेना, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका संजय कुमार, तहसीलदार दीवान सिंह राणा, व्यापार सभा अध्यक्ष विनय शर्मा, रघुवीर रावत, विमल नेगी, अनिल बहुगुणा सहित अन्य अधिकारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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