देहरादून। भाजपा उत्तराखंड की प्रदेश महामंत्री श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने JNU प्रकरण को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की बात तो बड़े-बड़े मंचों से करती है, लेकिन जब अपनी ही पार्टी के नेताओं पर महिलाओं से जुड़े गंभीर आरोप लगते हैं, तब उसके नेताओं की जुबान पर ताला लग जाता है। यही कांग्रेस की कथनी और करनी का अंतर है।
श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने कहा कि JNU में छात्राओं से अच्छे ग्रेड के बदले कथित तौर पर यौन संबंधों की मांग करने के गंभीर आरोपों से घिरे कांग्रेस सांसद एवं प्रोफेसर बिमोल अकोइजम के मामले में राहुल गांधी की चुप्पी बेहद सवाल खड़े करती है। एक तरफ राहुल गांधी पितृसत्ता के खिलाफ लड़ने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने का दावा करते हैं, दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के सांसद पर ऐसे गंभीर आरोप लगने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं देते। आखिर यह कैसी महिला हितैषी राजनीति है, जिसमें सिद्धांत दूसरों के लिए और चुप्पी अपने लोगों के लिए है?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश को जवाब देना होगा कि क्या महिला सम्मान की उसकी परिभाषा राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदल जाती है? जब मामला विपक्ष का हो, तब कांग्रेस सवालों की बौछार करती है, लेकिन जब सवाल अपने ही नेताओं पर उठते हैं, तब वही कांग्रेस मौन क्यों धारण कर लेती है? क्या राहुल गांधी की नैतिकता और महिला अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता केवल राजनीतिक लाभ तक सीमित है?
श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने कहा कि राहुल गांधी विद्यार्थियों के अधिकारों की बात करते हैं और खुद को युवाओं की आवाज बताते हैं। फिर JNU की छात्राओं से जुड़े इस गंभीर प्रकरण पर वे चुप क्यों हैं? क्या छात्राओं को न्याय दिलाने का उनका संकल्प अपनी पार्टी के नेताओं के सामने कमजोर पड़ जाता है? देश की बेटियां यह जानना चाहती हैं कि राहुल गांधी इस मामले में स्पष्ट जवाब देने से क्यों बच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच के बाद संबंधित प्रोफेसर के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई किए जाने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने अब तक अपनी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की है? क्या कांग्रेस पार्टी अपने सांसद के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों पर जवाबदेही तय करेगी या फिर राजनीतिक संरक्षण की आड़ में सवालों से बचती रहेगी? कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं।
श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने तीखे शब्दों में कहा कि कांग्रेस की राजनीति में महिला सम्मान की बातें करना आसान है, लेकिन उन सिद्धांतों पर अपने नेताओं के मामले में खरा उतरना असली परीक्षा है। महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा किसी पार्टी का राजनीतिक हथियार नहीं हो सकती। यदि कांग्रेस वास्तव में महिला अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, निष्पक्ष जांच का समर्थन करना चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वे इस गंभीर प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से जवाब देंगे? क्या वे अपनी पार्टी के सांसद के विरुद्ध लगे आरोपों पर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग करेंगे? या फिर महिला अधिकारों पर उपदेश देने वाली कांग्रेस अपने ही नेताओं के मामलों में चुप्पी साधे रहेगी?
श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने कहा कि देश की जनता अब केवल भाषण नहीं, बल्कि जवाबदेही चाहती है। महिलाओं के सम्मान की बात करने वालों को अपने आचरण से भी यह साबित करना होगा कि उनके लिए महिला सुरक्षा राजनीति से ऊपर है। कांग्रेस नेतृत्व को इस मामले पर जवाब देना ही होगा, क्योंकि महिलाओं के सम्मान और छात्राओं के न्याय से बड़ा कोई राजनीतिक हित नहीं हो सकता।