बरसात में कभी भी कहर बरपा सकती है रिस्पना और बिंदाल नदी

देहरादून। देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे बसी मलिन बस्तियों के लिए बारिश का मौसम हर साल जानलेवा खतरा बनकर आता है। इन नदियों के फ्लड प्लेन (बाढ़ वाले मैदानों) में सैकड़ों अवैध निर्माण और बस्तियां मौजूद हैं, जहां जलभराव और भूकटाव के कारण हजारों परिवारों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। एक सर्वे के अनुसार, रिस्पना और बिंदाल के करीब 13 किलोमीटर के हिस्से में लगभग 129 मलिन बस्तियां बसी हुई हैं, जिनमें 40,000 से अधिक लोग रहते हैं। नदी के प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र में अतिक्रमण होने के कारण भारी बारिश में नदी का पानी संकरा हो जाता है और तेजी से आसपास की बस्तियों में भर जाता है। हर वर्ष भारी बारिश के दौरान इन नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने से बस्तियों में पानी घुसने, मकानों को नुकसान पहुंचने और जनहानि तक की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसके बावजूद नदियों के फ्लड प्लेन और किनारों पर अतिक्रमण की समस्या जस की तस बनी हुई है।
शहर में रिस्पना और बिंदाल नदी के दोनों तरफ बस्तियां बन जाने के कारण नदियां संकरी हो गईं हैं, जिस कारण नदी में उफान आने पर स्थिति विकट हो जाती है। ज्यादा बारिश होने पर यह नदियां कहर बरपाती हैं। नगर निगम ने मानसून से पहले रिस्पना, बिंदाल और प्रमुख नदी-नालों की सफाई, मलबा और कूड़ा हटाने का अभियान चलाने का दावा किया है। निगम का कहना है कि जल निकासी बाधित न हो, इसके लिए मशीनों से सफाई कराई गई है। लेकिन, नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका है, जो कि हर बार ही तरह इस बार भी मानसून में खतरा बना रहेगा।
दून में 129 से करीब बस्तियां हैं, जिनमें हजारों परिवार निवास करते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी है जो रिस्पना, बिंदाल और अन्य नदी-नालों के किनारे या फ्लड प्लेन क्षेत्र में स्थित हैं। कई स्थानों पर मकान नदी की धारा तक पहुंच चुके हैं, जिससे बरसात के दौरान कटाव और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। फ्लड प्लेन नदी का प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र होता है, जहां तेज बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी फैलता है। यदि इस क्षेत्र में निर्माण कर दिए जाएं तो नदी का बहाव संकरा हो जाता है और पानी बस्तियों की ओर मुड़ जाता है।
देहरादून में बीते वर्षों के मानसून में कई बार रिस्पना और बिंदाल का जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी किनारे की बस्तियों में पानी भर गया। कई मकानों की दीवारें ढहीं, सड़कें बह गईं और लोगों को रातों-रात सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। कुछ घटनाओं में जनहानि भी हुई और करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। हालांकि, खतरे में बसे इन परिवारों को हटाना आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और उत्तराखंड हाई कोर्ट दोनों ही रिस्पना और बिंदाल पर अतिक्रमण को लेकर कई बार सख्त निर्देश दे चुके हैं। अदालतों ने फ्लड प्लेन का सीमांकन, अतिक्रमण हटाने, सीवेज रोकने और नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद कार्रवाई कई कारणों से धीमी रही है। सबसे बड़ी चुनौती हजारों परिवारों के पुनर्वास की है।

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