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चिंता करने से नहीं मेहनत करने से हल होती हैं मुश्किलें

जिंदगी बड़ी होती है और इसमें हमें समय-समय पर कई तरह के तजुर्बे होते हैं। कभी-कभी घोर मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। हममें से कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो इन मुश्किलों को ओढ़ लेते हैं और उसकी चिंता में घुलते रहते हैं। अब सवाल यह उठता है, चिंता करने से क्या मुश्किलें हल हो जाती हैं। जवाब सीधा है, नहीं। तो जनाब जब चिंता करने से मुश्किलें हल नहीं होती हैं, तो उसे सोच-सोचकर घुलने का क्या फायदा है। इससे तो अच्छा है कि सामने जो भी समस्या आई है उसके हल का रास्ता निकाला जाए। यही बात एक प्रोफेसर साहब ने अपने छात्रों को बेहद रोचक तरीके से समझायी।

प्रोफेसर दिनेश जब क्लास में दाखिल हुए तो उन्होंने अपने हाथ में पानी से भरा एक गिलास ले रखा था। गिलास को कहीं भी रखे बिना उन्होंने छात्रों के साथ अपनी बातचीत शुरू कर दी। उन्होंने उसे ऊपर उठा कर सभी छात्रों को दिखाया और पूछा, आपके हिसाब से गिलास का वजन कितना होगा?

किसी ने कहा, 50ग्राम, किसी ने 100ग्राम तो किसी ने 125ग्राम बताया। इस पर प्रोफेसर दिनेश ने कहा कि जब तक मैं इसका वजन ना कर लूं, मैं इसका सही वजन नहीं बता सकता। उन्होंने कहा लेकिन मेरा सवाल कुछ और हैं। आप लोग यह बताएं कि अगर मैं इस गिलास को थोड़ी देर तक इसी तरह पकडे़ रहूं तो क्या होगा ?

एक छात्र ने कहा, कुछ नहीं।

उन्होंने फिर पूछा, अच्छा, अगर मैं इसे इसी तरह एक घंटे तक उठाए रहूं तो क्या होगा?

आपका हाथ दर्द होने लगेगा, एक छात्र ने कहा।

तुम सही हो, अच्छा अगर मैं इसे इसी तरह पूरे दिन उठाए रहूं तो क्या होगा?

आपका हाथ सुन्न हो सकता है, आपके मांसपेशियों में भारी तनाव आ सकता है, लकवा मार सकता है और पक्का आपको अस्पताल जाना पड़ सकता है, किसी छात्र ने कहा और बाकी सभी हंस पड़।

फिर प्रोफेसर ने कहा, बहुत अच्छा, लेकिन क्या इस दौरान गिलास का वजन बदला?

उत्तर आया, नहीं।

तब भला हाथ में दर्द और मांशपेशियों में तनाव क्यों आया?

छात्र अचरज में पड़ गए।

फिर प्रोफेसर ने पूछा अब दर्द से छुटकारा पाने के लिए मैं क्या करूं?

गिलास को नीचे रख दीजिए, एक छात्र ने कहा।

बिलकुल सही प्रोफेसर ने कहा।

प्रोफेसर दिनेश ने इस पूरे मामले का सार छात्रों को समझाया कि अपनी जिंदगी की समस्याएं भी कुछ इसी तरह होती हैं। इन्हें कुछ देर तक अपने दिमाग में रखो तो लगेगा की सब कुछ ठीक है। उनके बारे में ज्यादा देर सोचिए और आपको तकलीफ होने लगेगी। इन्हें और ज्यादा देर तक अपने दिमाग में रखने से आपका माथा खराब हो जाएगा और आप कुछ नहीं कर पाएंगे।

इस कहानी से हम यह 3 बातें सीख सकते हैं :

अपने जीवन में आने वाली चुनातियों और समस्याओं के बारे में सोचना जरूरी है, पर उससे भी ज्यादा जरूरी है कि दिन के अंत में सोने जाने से पहले उन्हें अलग कर रख देना। इस तरह से आप तनाव में नहीं रहेंगे। आप हर रोज मजबूती और ताजगी के साथ उठेंगे और सामने आने वाली किसी भी चुनौती का डट के सामना कर सकेंगे।
जब तक जिंदगी है, परेशानियां आती रहेंगी। इनसे बचा नहीं जा सकता है। इससे बेहतर है कि परेशानियों से बचने के बजाए उनसे निपटने के रास्ते तलाशे जाएं। उसकी चिंता में घुलने से आप बोझिल हो जाएंगे और सही दिशा में काम नहीं कर पाएंगे।
मुश्किल परिस्थिति से विजेता बनकर निकलने के लिए धैर्य बहुत जरूरी है। अगर आप हर समय उसी मुश्किल के बारे में सोच-सोचकर हलकान होते रहेंगे, तो आगे की रणनीति कभी तैयार नहीं कर पाएंगे। इस तरह परेशानियों में दुष्चक्र में फंसकर एक दिन आपके सभी सपने दम तोड़ देंगे।

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