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राजस्थान के रण में रणबाकुरों ने भरी हुंकार, अब बारी प्रजा की

जयपुर : भारी गहमा-गहमी के बीच राजस्थान में विधानसभा की 199 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए प्रचार का शोर बुधवार शाम पांच बजे थम गया। अब सभी पार्टियों के प्रत्याशी डोर-टू-डोर कैंपेनिंग में जुट गए हैं। इन सबके बीच मरुधरा के इस महासंग्राम में एक बार फिर यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 20 साल पुरानी परंपरा टूटेगी या इतिहास एक बार फिर अपने आप को दोहराएगा? क्या मेवाड़ का किला फतह करने वाली पार्टी ही फिर सत्ता की सीढ़ी पर चढ़ेगी? इन सवालों के जवाब तो 11 दिसंबर को मिलेंगे, लेकिन उससे पहले वोटिंग की सभी तैयारियां निर्वाचन आयोग ने पूरी कर ली हैं। राज्य की 199 विधानसभा सीटों पर शुक्रवार को सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा । वहीं, चुनाव आयोग ने अलवर जिले की रामगढ़ सीट पर बीएसपी उम्मीदवार लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया है।

51,687 पोलिंग बूथ, 4.75 करोड़ से ज्यादा वोटर
राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य की 199 सीटों पर कुल 2274 प्रत्याशी मैदान में हैं। आगामी शुक्रवार को राज्य की 51,687 मतदान केंद्रों पर 4,75,54,217 वोटर्स अपने अधिकार का उपयोग करेंगे, जिनमें 2,47,22,365 पुरुष वोटर्स हैं और 2,27,15,396 महिला वोटर्स हैं। जबकि पोस्टल वोट्स की कुल संख्या 1,16,456 है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नागरिकों से भारी संख्या में वोट करने की अपील की है। यहां 07 दिसंबर को वोटिंग होनी है और नतीजों की घोषणा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और मिजोरम के साथ 11 दिसंबर को की जाएगी।

पिछले 20 साल से सत्ता परिवर्तन का इतिहास

विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सभी पार्टियों के स्टार प्रचारकों ने बड़ी संख्या में चुनावी सभाएं की हैं। चुनाव प्रचार में बीजेपी ने राज्य में 222 बड़ी जनसभाएं कीं जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 12 सभाएं शामिल हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य भर में कुल नौ चुनावी सभाओं को संबोधित किया। प्रचार अभियान के दौरान दोनों पार्टियों के नेताओं ने एक-दूसरे पर निजी हमले किए। राजस्थान में बीजेपी सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है और खास बात यह है कि राज्य में बीते 20 सालों में कोई भी पार्टी दोबारा सत्ता पर कब्जा नहीं जमा पाई है। चुनावी सर्वेक्षण राज्य में कांग्रेस को बढ़त दिखा रहे हैं, लेकिन बीजेपी ने अपने वोटों की संख्या बढ़ाने के लिए बीते कुछ दिनों में पूरी जोर-आजमाइश की है।

लोकल के बजाए छाए रहे राष्ट्रीय मुद्दे
मौजूदा चुनाव में किसानों की समस्या, भ्रष्टाचार और युवाओं के लिए नौकरी जैसे मुद्दों के बजाए राष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक जोर रहा। कांग्रेस नेताओं ने अपनी सभाओं में राफेल, करतारपुर कॉरिडोर, नीरव मोदी के सहारे बीजेपी पर निशाना साधा। वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी ने सर्जिकल स्ट्राइक, यूपीए सरकार में हुए घोटाले, भारत माता की जय और अगुस्टा वेस्टलैंड घोटाले जैसे मुद्दों के साथ कांग्रेस पर पलटवार किया। दोनों पक्षों ने राज्य के शिक्षित युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया। वहीं कांग्रेस ने किसानों के लिए कर्जमाफी का वादा किया है।

विद्रोहियों से परेशान बीजेपी और कांग्रेस
राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा के लिए मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है। लेकिन लगभग 50 सीटों पर दोनों प्रमुख दलों के विद्रोही उम्मीदवार मैदान में हैं, जो दोनों दलों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। राज्य में 830 स्वतंत्र उम्मीदवार भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। बीजेपी राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि कांग्रेस ने अपने सहयोगियों के लिए पांच सीटें छोड़ी हैं। बीएसपी ने 190 उम्मीदवार, सीपीआई (एम) ने 28 और सीपीआई ने अपने 16 उम्मीदवार खड़े किए हैं। वर्तमान में राज्य विधानसभा में बीजेपी के पास 160 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस के विधायकों की संख्या 25 है।

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