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दिल्ली में किसान आन्दोलन, कर्ज माफी सहित अन्य मांगो को लेकर पैदल मार्च

नई दिल्ली:  शीतकालीन सत्र के ठीक पहले संसद तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए देशभर से आए हजारों किसानों ने शुक्रवार को अपनी कवायद तेज कर दी है। इसके तहत ‘किसान मुक्ति मार्च’ के बैनर तले किसानों ने रामलीला मैदान से संसद भवन की ओर कूच शुरू कर दिया है।

वहीं, किसानों के मार्च के चलते रामलीला मैदान के बराबर की एक सड़क पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया। ट्रैफिक पुलिस दिल्‍लीवासियों को जाम से बचने के लिए अपने फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडिल पर ट्रैफिक की जानकारी को लगातार अपडेट कर रही है।

यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए यह जानकारी दी जा रही है। किसान मुक्‍ति मार्च के लिए पहुंचे किसानों के रास्‍ते में करीब 1000 ट्रैफिक पुलिसकर्मी के जवानों को लगाया गया है। इन जवानों को ट्रैफिक व्‍यवस्‍था दुरुस्‍त रखने की हिदायत दी गई है।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग तक किसानों को पैदल मार्च की अनुमति नहीं दी है। वहीं, किसानों संगठनों का कहना है कि उनका संसद भवन मार्च शांति पूर्वक होगा।

बता दें कि बड़ी संख्या में बिहार, पंजाब व उत्तर -प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली के रामलीला मैदान में बृहस्पतिवार दोपहर से ही जमा थे।

208 संगठन जुड़े
यह दो दिवसीय विरोध कार्यक्रम अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की अगुवाई में हो रहा है, जिससे अलग–अलग क्षेत्रों और राज्यों में काम कर रहे 208 किसान एवं सामाजिक संगठन जु़ड़े हैं। रामलीला मैदान में पंजाबी गायक जसबीर सिंह जस्सी ने अपनी प्रस्तुति से किसानों में जोश भर दिया।

…तो 2019 में कीमत चुकानी होगी
किसानों की मांग है कि किसानों के लिए अलग से संसद सत्र बैठे। किसान व किसानी के समक्ष संकट पर विस्तार से चर्चा हो और इन संकटों का हल निकले। उन्होंने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसान कर्ज मुक्ति के साथ फसलों का डेढ़ गुना दाम नहीं मिला, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में सरकार को इसकी कीमत चुकानी होगी।

पहले दिन पैदल मार्च किया
किसान मुक्ति मार्च के पहले दिन बृहस्पतिवार को स्वराज इंडिया पार्टी के अध्यक्ष योगेंद्र यादव व जय किसान आंदोलन के संयोजक अभिक साहा के नेतृत्व में देशभर से आए किसानों ने बिजवासन से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च किया।

किसान विरोधी सरकार : यादव
योगेंद्र यादव ने मौजूदा केंद्र सरकार को अब तक की सबसे अधिक किसान–विरोधी सरकार बताया। कहा कि किसान मुक्ति मार्च देश के किसानों की लूट, आत्महत्या, शोषषण और अन्याय से मुक्ति की यात्रा है। इस यात्रा में किसान अकेले नहीं हैं, बल्कि पूरा देश उनके साथ चल रहा है।

हक मांगने नहीं, लेने आए : वीएम सिंह
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा कि हम यहां पर अपने हक को मांगने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि अपना हक लेने आए हैं। किसान देश को खिलाता है ऐसे में देश को किसानों की इज्जत रखनी चाहिए।

निकाला मार्च, सड़कों पर लगा जाम
बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में बिहार, पंजाब व उत्तर-प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के किसान ट्रेन से दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पहुंचे। बड़ी संख्या में एकजुट होकर किसानों ने दोपहर में आनंद विहार से लेकर रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। इसमें खेतों में काम करने वाली महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। इसके कारण वाहन चालकों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ा।

ये हैं किसानों की अहम मांगें

किसान की पूरी तरह कर्ज माफी
फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजे की मांग
एमएस स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को पूरी तरह से लागू करने की मांग
किसानों को पेंशन देने की मांग
किसानों के लिए विशेष सत्र की मांग तेज
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 11 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के बीच किसानों के लिए अलग से विशेष सत्र बुलाने की मांग तेज कर दी है। इसको लेकर कई संगठनों से जुड़े लोगों ने बुधवार को आइटीओ चौक पर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में शामिल जनवादी लेखक संघ के महासचिव संजीव कुमार ने कहा कि तमाम प्रयासों के बाद भी किसानों की दशा बेहद खराब है। उन पर विशेष ध्यान देने और योजना बनाने की जरूरत है, इसलिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर 30 नवंबर को संसद मार्ग पर किसान रैली होगी।

सामाजिक कार्यकर्ता मलयश्री हाशमी ने कहा कि यह सत्र कम से कम 21 दिनों का हो। लेखक हरियश राय ने कहा कि विशेष सत्र में किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हो।

डीयू के शिक्षकों ने किसानों को दिया समर्थन
डीयू के शिक्षक एवं छात्र किसानों के समर्थन में शुक्रवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने जा रही रैली में शामिल होंगे। इससे पहले बृहस्पतिवार उन्होंने अंबेडकर स्टेडियम में किसानों को खाने के पैकेट भी बांटे।

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