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तो क्या सिंधिया नहीं बन पाएंगे मुख्यमंत्री!

अजय पाटिल
क्या आप सिंधिया को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते है? क्या आप अपना वोट कांग्रेस को इसलिए देने जा रहें क्योंकि आप सिंधिया को पसंद करते हैं? यदि ऐसा है तो आप को इस लेख को अवश्य पढ़ना चाहिए। पूरा पढ़ना चाहिये। इस पर चिंतन करना चाहिये।

इस चुनाव में कांग्रेस के तीन बड़े चेहरे कांग्रेस की मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाओं में कमान हात में लिए हुए हैं। कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया व दिग्विजय सिंह। राहुल जी ने ऐसा क्यों किया? विचार कीजिये। ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बेदाग़ चेहरा हैं। युवाओं की पसंद हैं। इस लिए उन्हें आगे किया गया है पर सिंधिया की मध्यप्रदेश स्तर पर कांग्रेस के संगठन पर पकड़ मजबूत नहीं है। उनकी संगठनात्मक पकड़ व प्रभाव सिर्फ़ ग्वालियर चंबल संभाग तक ही सीमित है। इसलिए प्रदेश चुनाव की कमान अकेले सिंधिया को देना संभव नहीं था।

सिंधिया की यह कमी दिग्विजय सिंह को महत्व देने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन को मजबूर करती है। मध्यप्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह की संगठन पर सबसे मजबूत पकड़ है। प्रत्येक विधानसभा के कम से कम 20 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वो नाम से जानते ही होंगे। इस स्तर का कोई नेता कांग्रेस के पास मध्यप्रदेश में नहीं है। पर दिग्विजय सिंह की अत्याधिक ख़राब छवि उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है। और यही कमजोरी उन्हें मुख्यमंत्री की रेस से बाहर करती है।

अब आप विचार कीजिये कि कमलनाथ को क्यों इन चुनाओं में महत्व दिया गया? क्यों उन्हें प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी गई। वो प्रदेश के नेता नहीं हैं। उन्होंने आजीवन केंद्र की राजनीति की है। कांग्रेस के प्रदेश संगठन में उनकी पकड़ दिग्विजय सिंह के मुकाबले शून्य है। फिर प्रदेश की राजनीति में कमलनाथ का प्रवेश क्यों? आइये इसे समझते हैं।इसके लिए आपको कांग्रेस का इतिहास खंगालना पड़ेगा।

नेहरू गांधी परिवार की सबसे पहली प्राथमिकता कांग्रेस में वंश परंपरा को बनाए रखने की रही है। इस बात के संस्कार नेहरू गांधी परिवार के प्रत्येक सदस्य को या तो विरासत में ही मिलते हैं या उन्हें दिए जाते हैं।जब कभी भी कोई नेहरू गांधी परिवार की राजनीति में खतरा प्रतीत होता है तब उसे बड़ी सफाई से रास्ते से हटा दिया जाता है।

नेहरू जी अपनी बेटी को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने उन सभी नेताओं को रास्ते से हटा दिया जो इंदिरा के लिए भविष्य में खतरा बन सकते थे। कामराज योजना के तहत 6 मुख्यमंत्रियों और 6 कैबिनेट मंत्रियों को त्यागपत्र देने के लिए मजबूर किया गया। ये सभी, वो मजबूत नेता थे जो भविष्य में इंदिरा जी के लिए खतरा हो सकते थे।

बाद में इंदिरा जी भी अपने पिता नेहरू जी के पदचिन्हों पर चलीं। उन्हें भी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को ठिकाने लगाने में अपने पिता की तरह महारत हासिल थी। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु पी एन हक्सर की सहायता से उन सभी कांग्रेस नेताओं का राजनीतिक भविष्य तबाह कर दिया जो उनके मार्ग में बाधा बन सकते थे। उन्हें राजनीतिक चुनौती दे सकते थे। के कामराज जिन्होंने इंदिरा को प्रधानमंत्री बनने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई उन्हे भी नहीं छोड़ा गया।

ये है नेहरू गांधी परिवार का क्रूर राजनीतिक इतिहास। आज फिर आदरणीय राहुल गांधी इस इतिहास को दोहरा सकते हैं। अपने राजनीतिक संस्कारों का उपयोग कर सकते हैं। कमलनाथ एक बुजुर्ग नेता है। जोकि राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य के लिए खतरा नहीं हो सकते। दिग्विजय सिंह जी की खराब छवि उनके राजनीतिक भविष्य पर पूर्ण विराम लगा चुकी है। अब बचे हैं आदरणीय सिंधियाजी जोकि राहुल जी के हम उम्र रहे। अच्छी छवि रखते हैं। शानदार व्यक्तित्व है। युवाओं की पसंद हैं। निःसंदेह ये भविष्य में राहुल जी के लिए खतरा हो सकते हैं।

आपको नहीं लगता कि सिंधिया व दिग्विजय सिंह का उपयोग सत्ता की मंजिल तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों के रूप में किया जा रहा है। यदि कांग्रेस को सत्ता मिली तो मुख्यमंत्री का पद कमलनाथ को सौंप दिया जाएगा। जब कांग्रेस का इतिहास खंगाला जाता है तो संभावना तो यही बनती है। सिंधिया के नाम पर कांग्रेस को वोट देने वाले पुनः विचार करें।

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