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गंगी सडक़ निर्माण से वन संपदा को हो रहा नुकसान

टिहरी। भिलंगना ब्लॉक के अंतिम गांव गंगी को सडक़ से जोडऩे के लिए सालभर पहले साढ़े चार करोड़ की लागत से 9.3 किमी मोटर मार्ग की स्वीकृति दी गई थी, जिसमें अब तक साढ़े सात किमी तक कटिंग भी कर दी गई है। लेकिन सर्वे के अनुरूप सडक़ नहीं बनाई जा रही है। कार्यदायी संस्था भी वन विभाग की एनओसी लिए बगैर ही हरे पेड़ काट रही है। ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए एलाइनमेंट के अनुरूप सडक़ निर्माण करने की मांग की है।

सीमांत गंगी गांव के लिए पीएमजीएसवाई सडक़ निर्माण कर रहा है, जिस पर अभी तक साढ़े सात किमी प्रथम चरण का कार्य किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग पूर्व में तय किए गए एलाइनमेंट के अनुसार सडक़ नहीं बना रहा है। इसके उलट मनमर्जी से दूसरी जगह से कटिंग कर पेड़ काटे जा रहे हैं। वन विभाग भी इस पर मौन बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सडक़ निर्माण का मलबा भी डंपिंग जोन के बजाए नदी में उड़ेला जा रहा है, जिससे मिश्रित वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। क्षेत्र के बीएस रावत, बावन सिंह, बचन सिंह, चैत सिंह, बिशन सिंह ने कहा कि सडक़ निर्माण एलाइनमेंट के अनुसार नहीं किया जा रहा है।

ठेकेदार मनमर्जी से सडक़ बनाकर हरे पेड़ काटकर वन संपदा को भी नुकसान पहुुंचा रहा है। उन्होंने डीएम को ज्ञापन भेजकर इसकी जांच कराने की मांग की है। इस बाबत वन रेंज अधिकारी एसएस नेगी ने कहा कि विभाग द्वारा कहीं भी डंपिंग जोन नहीं बनाया गया है। सडक़ कटिंग का मलबा वन भूमि में डाला जा रहा है, जिससे कई प्रजाति के वनस्पति नष्ट हो रही है। इस पर पीएमजीएसवाई को नोटिस भेजा जा रहा है।

गंगी सडक़ निर्माण एलाइनमेंट के अनुसार ही किया जा रहा है। पहाड़ होने के कारण कुछ ऊपर-नीचे कटिंग की जा रही है। जिससे वन संपदा को कोई नुकसान नहीं हो रहा है।

– संजीव यादव, एई, पीएमजीएसवाई नई टिहरी।

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