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इस आरती से होती है महालक्ष्मी की पूजा पूरी

देवी लक्ष्मी से पहले भगवान गणेश और श्री हरि विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इससे वह जल्दी प्रसन्न होती हैं। वैसे तो लक्ष्मी जी की पूजा हर रोज करनी चाहिए लेकिन शुक्रवार के दिन लक्ष्मी जी की पूजा और आरती का खास महत्व होता है। आरती के बिना पूजा पूरी नहीं होती। जब भी लक्ष्मी पूजा करें तो थाली में ये खास चीजें जरुर रखें- चावल, कुमकुम, चंदन और गाय के घी का दीपक। धन से संबंधित किसी भी तरह की परेशानी से आपको रूबरू होना पड़ रहा है तो यहां बताए जा रहे पांच तरह के प्रसाद पहले महालक्ष्मी को चढ़ाएं फिर खुद भी खाएं और परिवार के सभी सदस्यों को भी खिलाएं। ऐसा करने से घर में बरसने लगेगा धन। मां लक्ष्मी दोनों हाथों से खजाना लुटाएंगी। आपकी धन-दौलत से जुड़ी समस्त मनोकामनाओं को पूरे होने का वरदान दे देंगी- बताशा, पान, जल स‌िंघारा, खीर और मखाने।

लक्ष्मी जी की आरती-
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

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