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भारत के साथ मजबूत सैन्य संबंध चाहता है यूरोपीय संघ

भारत के साथ तकरीबन 14 वर्ष पहले रणनीतिक संबंध की घोषणा करने के बाद यूरोपीय संघ (ईयू) ने अब सैन्य क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को नये मुकाम पर ले जाने की इच्छा जताई है। यूरोपीय संघ के संसद में मंगलवार को भारत को लेकर ईयू की रणनीति पर नया प्रपत्र पेश किया गया। यह प्रपत्र अगले 10 से 15 वर्षों के लिए भारत व यूरोपीय संघ के बीच रिश्तों की दिशा दिखाता है। इस प्रपत्र से साफ है कि अमेरिका की तरह ईयू भी भारत को भविष्य में एक अहम सैन्य साझेदार के तौर पर देख रहा है।

यूरोपीय संघ की तरफ से भारत के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत बनाने का यह संकेत तब दिया गया है जब स्वयं इसके भीतर सैन्य ताकत को बढ़ाने की कवायद नए सिरे से शुरु हुई है। दो दिन पहले ही यूरोपीय संघ ने सैन्य जरूरतों से जुड़े 17 उद्योगों को बढ़ावा देने का फैसला किया है। दूसरी तरफ जर्मनी समेत कई ईयू के देश यूरोपीय संघ के पास मजबूत सैन्य ताकत बनाने की मांग कर रहे हैं।

भारत के संदर्भ में जारी प्रपत्र में कहा गया है कि ईयू ने अपने सैन्य क्षमता को मजबूत करना शुरु कर दिया है। ऐसे में भारत के साथ स्थाई सैन्य सहयोग का ढांचा होना चाहिए। संयुक्त सैन्य अभ्यास का भी प्रस्ताव किया गया है। इसमें कहा गया है कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत व ईयू के सैन्य हित एक जैसे हैं। समुद्री सैन्य बलों के बीच सहयोग का खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा गया है कि दोनों के कारोबारी व रणनीतिक हितों को देखते हुए यह जरुरी हो गया है। ईयू की तरफ से कहा गया है कि वह भारत में सैन्य सलाहकार की नियुक्ति पर विचार कर रहा है और उम्मीद करता है कि भारत भी ऐसा करेगा।

नई दिल्ली में ईयू के राजदूत टॉमस कोजिवोस्की ने इस प्रस्ताव के बारे में बताया कि, ईयू कोई सैन्य संगठन नहीं है लेकिन हम लगातार अपनी सैन्य ताकत के बारे में विमर्श कर रहे हैं। ईयू में एक मजबूत रक्षा उपकरणों के निर्माण से जुड़े उद्योगों को भी खड़ा किया जा रहा है। भारत व ईयू समुद्री सुरक्षा के साथ ही आतंकवाद के खिलाफ एक दूसरे की मदद कर सकते हैं। हाल ही में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को लेकर काफी विमर्श चल रहा है।

ईयू के राजदूत मानते हैं कि वर्ष 2004 में रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के बाद अब ठोस धरातल पर काम करने का वक्त आ गया है। यूरोपीय आयोग की तरफ से जारी प्रपत्र में इस बात के साफ संकेत है कि भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को हर तरह से प्रगाढ़ करने के लिए आयोग की तरफ से संयुक्त तौर पर किस तरह के कदम उठाए जाएंगे। इसके आधार पर आयोग के दूसरे देश भी भारत के साथ रिश्तों को तय करेंगे।

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