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गुमनामी में अस्तित्व खोज रही शुकदेव की तपोस्थली

अल्मोड़ा। कम ही लोग जानते हैं, महाभारतकाल के मुनिश्रेष्ठ शुकदेव ने पांडवयुगीन सभ्यता के गवाह बगवालीपोखर (पौराणिक द्वारका) से दो किमी दूर तपस्या की थी। व्यासनंदन महर्षि वेदव्यास की धर्मपत्नी के गर्भ में ही 12 वर्षो तक रहे शुक ने वेद, उपनिषद, दर्शन व पुराण आदि का सम्यक ज्ञान ले लिया था। भगवान श्रीकृष्ण के वरदान से जन्मे शुक तत्काल बाद तप करने जंगल चले गए। महर्षि वेदव्यास ने श्री कृष्ण लीला का एक श्लोक रचा, शिष्यों को याद करा उसी ओर भेजा, जहां शुक ध्यानमग्न थे। श्री कृष्ण लीला के अभिभूत शुक महर्षि पिता के आश्रम जा पहुंचे। जहां वेदव्यास ने उन्हें श्रीमद्भागवत के 18 हजार श्लोकों का विधिवत ज्ञान दिया। शुकदेव ने इसी भागवत का ज्ञान राजा परीक्षित को देकर मृत्यु के भय से मुक्त कर बगवालीपोखर के इसी वन में पुन: तपस्यारत हो गए। मगर अफसोस मुनिश्रेष्ठ शुकदेव की यह तपोस्थली गुमनामी का दंश झेल रही। यह हाल तब है जब देवभूमि पर काबिज सरकारें तीर्थाटन के जरिये धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे कर रही।

कालांतर में कत्यूरी शासकों ने बगवालीपोखर स्थित शुकदेव की तपोस्थली में वलभी शैली में मंदिर स्थापित किया। नाम दिया शुकेश्वर महादेव मंदिर। कालांतर में चंद राजाओं ने इसे संरक्षित रखा। उच्च शिखरयुक्त नागर शैली में पंचरथ की आकृति दे मुनिश्रेष्ठ शुकदेव के इतिहास को भी संरक्षित रखा। मान्यता है कि श्रीमद्भागवत पुराण कथा तभी पूर्ण मानी जाती है जब श्रद्धालु शुकेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन किए जाएं।

रखरखाव के अभाव व जनजागरूकता के अभाव में यह धार्मिक, आध्यात्मिक व पुरातात्विक महत्व वाली एतिहासिक धरोहर संकट में है। विशिष्ट शैली में निर्मित मंदिर के पिछले हिस्से में दरार लगातार चौड़ी हो रही। पकड़ खोते जाने से मंदिर की पीठ बाहर की ओर झुकने लगी है। इससे केदारनाथ की प्रतिकृति बेडौल सी लगने लगी है। दुर्भाग्य कि सरकारें इसके संरक्षण को ठोस कदम न उठा सकी।

धार्मिक व पुरातात्विक महत्व वाले शुकेश्वर महादेव मंदिर को संरक्षित कर तीर्थाटन की वकालत करते हुए उपनेता करन सिंह माहरा ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाने के बाद पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को पत्र लिखा है। उन्होंने तर्क दिया है कि बगवालीपोखर स्थित मुनिश्रेष्ठ शुकदेव की तपोस्थली को पर्यटन सर्किट से जोड़ श्रीमद्भागवत पुराण कथा के जरिये तीर्थाटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

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