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‘आयुष्मान भारत’ लाभार्थियों को दिसंबर तक पीएम के हस्ताक्षर वाला पत्र भेजा जाएगा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भागीरथ काम सौंप दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इतने कम समय में इतना बड़ा काम कैसे पूरा होगा। लेकिन प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद जेपी नड्डा ने अधिकारियों को किसी भी कीमत पर इसे पूरा करने का फरमान सुना दिया है। मामला आयुष्मान भारत के तहत 10.74 करोड़ लाभार्थी परिवारों को प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर वाले पत्र को पहुंचाने का है।

कुल 10.74 करोड़ परिवारों को भेजा जाएगा पीएम का पत्र

दरअसल आयुष्मान भारत के तहत आने वाले लाभार्थी परिवारों को प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भेजा जा रहा है। इस पत्र में लिखा होता है कि उनका परिवार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आता है, इसीलिए उन्हें परिवार के सदस्यों की बीमारी के इलाज की चिंता करने की जरूरत नहीं है। परिवार के सदस्यों को होने वाली बीमारी के इलाज पर होने वाला पांच लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठाएगी। अभी तक लगभग चार करोड़ परिवारों को यह पत्र जा चुका है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार प्रधानमंत्री ने 31 दिसंबर तक सभी लाभार्थी परिवारों को पत्र पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। ऐसे में केवल 45 दिनों में छह करोड़ 74 लाख परिवारों को पत्र पहुंचाना होगा। इनमें अधिकांश परिवार दूर-दराज के गावों में रहते हैं। यानी हर दिन लगभग 15 लाख पत्र पहुंचाने होंगे। जबकि अभी तक औसतन हर दिन आठ लाख पत्र भेजे जा रहे थे। यानी अब पहले की तुलना में दोगुना पत्र भेजना होगा।

देश के लगभग 50 करोड़ लोगों को सालाना पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने वाला आयुष्मान भारत अगले साल आम चुनाव को देखते हुए सरकार के गेमचेंजर माना जा रहा है। लेकिन अधिकांश गरीबों को इस योजना के बारे में जानकारी ही नहीं है। वैसे तो कोई भी योजना में खुद के लाभार्थी होने या नहीं होने की जानकारी आनलाइन ले सकता है।

इस बारे में जानकारी देने के लिए एक नंबर भी जारी किया गया है, लेकिन गरीब, अनपढ़ और दूरदराज के इलाकों में रहने वालों को इसकी भी जानकारी है। ऐसे में सबसे सही तरीका यह है कि परिवार के पास प्रधानमंत्री का पत्र पहुंचाया जाए। एक बार पत्र मिल जाने के बाद उन्हें पूरा भरोसा भी जाएगा और इसका लाभ भी उठाने लगेंगे।

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