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तो क्या राजस्थान हिंदुत्व कार्ड खेलेगी बीजेपी? गायब है मुस्लिम चेहरा

क्या राजस्थान का विधानसभा चुनाव इस बार बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ेगी? जिस तरह से बीजेपी ने अपनी पहली सूची में किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है उसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

दरअसल, राजस्थान में शुरू से ही बीजेपी विधानसभा चुनाव में 6 से 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देती रही है, लेकिन इस बार 5 बार के विधायक रहे नागौर के बीजेपी विधायक हबीबुर्रहमान का टिकट काट दिया गया है.

सत्तारुढ़ बीजेपी ने एक दिन पहले चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी. 200 सदस्यीय विधानसभा के लिए 131 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में 12 महिलाओं और 32 युवा चेहरों को मौका दिया गया जबकि इसमें मुस्लिम नाम नदारद हैं.

सरकार के नंबर 2 का नाम भी गायब!

राजस्थान सरकार में पिछले 5 साल से नंबर दो की हैसियत से 2-2 मंत्रालय (पीडब्ल्यूडी और रोडवेज) संभालने वाले यूनुस खान का नाम पहली सूची से गायब है. इसी तरह सीकर और झुंझुनू में बीजेपी मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा करती आई है जहां पर इस बार टिकट नहीं दिया है.

इसके अलावा खुद वसुंधरा राजे के क्षेत्र धौलपुर से भी दो बार सगीर अहमद विधायक रह चुके हैं, लेकिन इस बार उन्हें भी टिकट नहीं दिया गया है. वसुंधरा राजे के चुनाव क्षेत्र झालावाड़ में भी मुस्लिम बड़ी संख्या में वसुंधरा राजे को वोट देते आए हैं और वहां पर उनके चुनाव का पूरा जिम्मा असद अली संभालते हैं और झालावाड़ के बीजेपी दफ्तर भी असद अली के घर से चलता है.

वसुंधरा राजे हमेशा से 36 के 36 कौमों को साथ लेकर चलने की बात करती रही है, लेकिन इस बार कई सीटों पर संघ के दबाव में वसुंधरा राजे को झुकना पड़ा है.

ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी की राजस्थान में घटती लोकप्रियता को भरने के लिए बीजेपी हिंदुत्व के एजेंडे पर सवार हो सकती है. बीजेपी की तरफ से मुस्लिम उम्मीदवारों का खड़ा ना होना तो चर्चा का विषय बना हुआ है.

इस बार राजस्थान के चुनाव में 40 रैलियां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रखी गई हैं. इसके अलावा चार रोड शो भी योगी आदित्यनाथ करेंगे. योगी आदित्यनाथ का इस तरह से राजस्थान में रैली और सभा करवाना यह दिखाता है कि बीजेपी राजस्थान विधानसभा चुनाव में अपना ब्रह्मास्त्र हिंदुत्व को चल सकती है.

नागौर में आरएसएस

नागौर में बीजेपी के दो विधायक जीतते रहे हैं. पांच बार के एमएलए हबीबुर्रहमान और वसुंधरा के सबसे करीबी मंत्री यूनुस खान को टिकट नहीं मिलने पर ऐसा कहा जा रहा है कि नागौर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने हिंदुत्व की एक प्रयोगशाला के रूप में देख रहा है.

पिछले 5 सालों में संघ प्रमुख मोहन भागवत दो बार नागौर में प्रवास कर चुके हैं. इसके अलावा दिल्ली में भी आतंकी घटनाओं में कई अल्पसंख्यकों के गिरफ्तारी नागौर से हुई है. नागौर में भारत माता के खिलाफ नारे लगाने पर 10 मुस्लिम लड़के भी लंबे समय तक जेल में रहे.

इस मामले पर जब बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी से पूछा गया कि क्यों बीजेपी किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को पहली सूची में जगह नहीं दी है. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस ने अभी तक मुसलमानों को टिकट देकर उन्हें ठगा है. अल्पसंख्यक समाज में शिक्षा, भुखमरी और गरीबी की जितनी समस्याएं हैं वह सब कांग्रेस की देन है. टिकट देने नहीं देने से कोई फर्क नहीं पड़ता.

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