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यहाँ पिता पुत्र को भाई भाई को ही मात देने में जुटे, चाचा भतीजे में भी जंग

रीवा। 28 अक्टूबर को होने वाले मतदान में मुकाबला काफी रोमांचक मोड़ में पहुँच गया है। विंध्यप्रदेश की राजधानी में तो मुकाबला और रोमांचक हो गया है। इस बार मन जा रहा है कि रीवा की आठों सीटों में जबरदस्त जंग होगी। हालांकि मुख्य पार्टियों की तरफ से अभी तक कोई भी प्रत्याशियों की कोई भी लिस्ट जारी नहीं की गई है। विंध्य प्रदेश में टिकट की जंग इस बार बाहरी लोगों में कम भीतरी लोगों में ज्यादा है। कहीं पिता पुत्र के बीच तो कहीं भाई भाई के बीच टिकट की जुगत जारी है। इस लड़ाई में चाचा भतीजे भी पीछे नहीं हैं। रीवा सहित विंध्य की राजनीति में अपना खासा दखल रखने वाले मध्यप्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी के घर में ही चुनावी घमासान मचा हुआ है। गुढ़ से उनके बेटे सुंदरलाल तिवारी फिलहाल कांग्रेस से विधायक और इस बार फिर टिकट के दावेदार हैं। उनका टिकट लगभग तय भी है। उन्हीं के भतीजे विवेक तिवारी भी मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। वो खुद को श्रीनिवास तिवारी का असली राजनैतिक उत्तराधिकारी मानते हैं। वो स्व तिवारी की परपंरागत सीट सिरमौर से ताल ठोके बैठे हैं।

रीवा सीट से बीजेपी विधायक और मंत्री राजेंद्र शुक्ला इस बार भी प्रबल दावेदार हैं। रीवा सीट को भाजपा शत-प्रतिशत अपनी ही मानकर चल रही है। पर मंत्री राजेंद्र शुक्ला के बड़े भाई ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस से टिकट के दावेदार थे। टिकट नहीं मिलने की संभवना दिखी तो मऊगंज से निर्दलीय चुनाव आतुर बैठे हैं रीवा राजघराना भी परिवारवाद से बच नहीं पाया है. राजघराने में पिता पुष्पराज सिंह कांग्रेसी और बेटा दिव्यराज भाजपा विधायक है। ऐसे मे दोनों ही पार्टी के लिये यह तय कर पाना है की कैसे और कहां इनका उपयोग करें। राजघराने में पिता महाराजा पुष्पराज सिंह कांग्रेसी हैं और उनके बेटे दिव्यराज बीजेपी विधायक हैं। पिछले दिनों चर्चा थी कि महाराजा अपने बेटे को राजनीतिक विरासत सौंप कर मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। लेकिन इसी बीच वो कांग्रेस में लौट आए और उपाध्यक्ष बना दिए गए।

कांग्रेस हो या भाजपा, परिवार वाद दोनों में है। परिवारवाद ने दोनों दलों के सारे समीकरण बिगाड़ रखे हैं।
दिव्यराज को सेमरिया से लड़ा सकती है भाजपा
इधर सूत्रों से एक और खबर आ रही है। भाजपा रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा को विस क्षेत्र सेमरिया से उतारने जा रही थी, पर सांसद ने विस चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। अब संगठन सिरमौर विद्यायक को सेमरिया भेजने की फ़िराक में है।

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