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अब पैन कार्ड और आधार से पकड़े जाएंगे रेपिस्ट – केंद्र सरकार ने की शुरुआत

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महिलाओं के प्रति अपराध रोकने के मामले में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने यौन अपराधियों के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री की शुरुआत की है. भारत में यह अपनी तरह का पहला कदम है. इसके साथ ही भारत यौन अपराधियों का डेटाबेस बनाने वाला विश्व का नवां देश बन गया है. भारत से पहले इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका और त्रिनिदाद एंड टोबैगो में पहले से ही इस तरह का डाटा रिकॉर्ड बनाने की व्यवस्था है. हालांकि भारत में यह डेटा केवल जांच एजेंसियों के लिए ही उपलब्ध होगा. जबकि अमेरिका जैसे देश में यह डेटा आम जनता भी देख सकती है.

क्या-क्या होगा इस रजिस्ट्री में?
इस रजिस्ट्री में ऐसा अपराध करने वालों की ये डीटेल्स होंगी – नाम, फोटो, पता, उंगलियों के निशान, डीएनए सैंपल, पैन नंबर और आधार नंबर. यह सारा डाटाबेस नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) बनाएगा. इसमें करीब 4.5 लाख केस का रिकॉर्ड डाल दिया गया है. इस रजिस्ट्री में पहली बार के अलावा कई बार ऐसे अपराध कर चुके सभी अपराधियों के नाम होंगे. यह सारी जानकारी देशभर की जेलों से इकट्ठा की जाएगी.

कौन-कौन कर सकेगा इस जानकारी का यूज

एक सीनियर अधिकारी ने इस मौके पर बताया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) इससे जुड़ी अपनी सारी जानकारी गृह मंत्रालय को देगा. और कानून लागू करने वाली एजेंसियां इसका कई कामों के लिए प्रयोग करेंगी. यह जानकारियां किसी मामले या किसी संदिग्ध की जांच में प्रयोग की जा सकती हैं. इन आंकड़ों की जांच कर देखा जाएगा कि कोई व्यक्ति समाज के लिए बड़ा खतरा तो नहीं है. हालांकि जैसा बताया गया, भारत में केवल कानूनी एजेंसियां ही देख सकेंगी कि इस रजिस्ट्री में किसका-किसका नाम है. जबकि अमेरिका में यह सभी के लिए उपलब्ध है.

कठुआ रेपकेस ने इस रजिस्ट्री की बात पक्की की
अप्रैल में कठुआ रेपकेस के बाद देशभर में बच्चों के प्रति अपराध पर जबरदस्त गुस्से को देखते हुए सरकार ने यह रजिस्ट्री बनाने का फैसला किया था. NCRB के आंकड़ों के हिसाब से भी 2015 के मुकाबले 2016 में महिलाओं के प्रति अपराधों में 3 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. वहीं केवल रेप के मामलों की बात करें तो 2015 के मुकाबले 2016 में 12 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. 2015 में 34. 651 रेप के केस दर्ज किए गए थे. जबकि 2016 में ये बढ़कर 38,947 हो गए.

फॉरेंसिक जांच के साथ मिलकर डाटाबेस पकड़ सकता है क्रिमिनल
माना जा रहा है कि ऐसे मामलों में इस डाटाबेस से बहुत मदद मिल सकती है जब रेप के बाद हत्या कर दी जाती है और कोई खास सबूत नहीं मिलते. ऐसे मामलों में फॉरेंसिक जांच से मिले उंगलियों के निशान आदि को इस डाटाबेस से मिलाकर अपराधी/ अपराधियों को आसानी से पहचाना और पकड़ा जा सकेगा. हां, इसके लिए यह जरूरी है कि व्यक्ति ने पहले भी ऐसा अपराध किया हो. अपराधी का बाल, खून, वीर्य या नाखून भी उसे पकड़वा सकेंगे.

अमेरिका की तरह इसे सार्वजनिक किए जाने पर है जबरदस्त बहस
भारत में भी इसे अमेरिका की तरह ही सार्वजनिक किए जाने की मांग कुछ लोगों ने की है ताकि इससे ज्यादा फायदा हो सके. अमेरिका में इसे सार्वजनिक किए जाने के फायदे बताए जाते हैं –

यह परिवार के लोगों की खासकर बच्चों की सुरक्षा में सहायता कर सकता है.

यह इस फैसले को भी प्रभावित कर सकता है कि आप अपने परिवार के साथ कहां पर घर लें.

यह पुलिस की जांच में मदद कर सकता है. यह समझने में मदद कर सकता है कि कौन एक अपराधी हो सकता है, कौन नहीं?

यह लोगों को यह जानने का अधिकार देता है कि उनके पड़ोस में कौन-कौन अपराधी है.

यह ऐसे अपराधों के दोहराए जाने पर आसानी से अपराधियों को पकड़ने की संभावना बढ़ा देता है.

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