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सात साल में उत्‍तराखंड के इतने गांव बने घोस्ट विलेज

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी द्वारा प्रदेश के 7950 गांवों के सर्वे के आधार पर पलायन को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट पर आयोग के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अनुमोदन दे दिया है। उन्हें यह रिपोर्ट 20 अपै्रल को सौंपी गई थी। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि प्रदेश के सभी गांवों से पलायन हो रहा है, लेकिन पांच पर्वतीय जिलों में स्थिति खराब है। यहां राज्य औसत से अधिक पलायन हुआ है। राज्य औसत एक गांव से 60 लोगों का पलायन है। इस लिहाज से रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा जिलों के गांवों से प्रति गांव इससे कहीं अधिक पलायन हुआ है। कुछ गांव तो शत-प्रतिशत खाली हो चुके हैं।

उत्तराखंड में पलायन के कारण भुतहा गांवों (घोस्ट विलेज, यानी वीरान हो चुके गांव) की संख्या बढ़कर अब 1668 पहुंच गई है। ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की रिपोर्ट पर गौर करें तो पिछले सात सालों में 700 गांव वीरान हो गए। इससे पहले वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में भुतहा गांवों की संख्या 968 थी। यही नहीं, रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि राज्य के पांच पहाड़ी जिलों रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा में पलायन की चिंताजनक तस्वीर उभरकर सामने आई है। यहां के गांवों में पलायन राज्य औसत से कहीं अधिक है। सुकून इस बात का है कि पहाड़ के गांवों से 70 फीसद लोगों का पलायन राज्य में ही हुआ है, जबकि 29 फीसद ने राज्य से बाहर और एक फीसद ने विदेश में पलायन किया है।

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